संदीप कुमार सिंह 23 Nov 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है।जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभांवित होंगें। 8597 0 Hindi :: हिंदी
क्या कहूं आज मैं आप से। डरता मैं हूं बहुत पाप से। मैं प्यार का एक मस्त राही- डरूं नहीं कद की नाप से । (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:-समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....