भूपेंद्र सिंह 20 Dec 2023 कविताएँ समाजिक बाजार छोड़कर खेतों की और चले 7168 0 Hindi :: हिंदी
एक आग की चिंगारी को हृदय में जलाना चाहिए, आज की सुबह बाजारों के बजाय खेतों में जाना चाहिए, सपने कम हो एक ही सही, मगर बनाना चाहिए, हर शहर वासी को खेत का किस्सा सुनना और सुनाना चाहिए, गीत एक ही सही मगर खेतों पे गाना चाहिए, सरसों पे पड़ी ओस की बूंदों से नहाना चाहिए।। खेतो में चिड़िया चहचाती है, खेतों में फसलें लहलाती है, खेतों में ठंडी हवाएं चलती है , घास को सफेद गाएं चरती है, रेत के बड़े बड़े टीले नज़र आते है, पेड़ो के पते भी गिले नज़र आते है।।