UMMED JHAJHOTAR 01 Sep 2025 कविताएँ प्यार-महोब्बत कविता 3438 2 5 Hindi :: हिंदी
उजड़ी हुई बस्ती में किसको ढूंढते हो, जनाब जब उजाला बहुत दूर है, छायाएँ बिखरी हुईं। बरबाद लोग, चुपचाप खड़े, किताबों के बीच धुंधले सपनों की तलाश में। हर पन्ना एक कहानी, हर शब्द एक आहट, क्या तुम समझते हो, ये विरानियाँ किसकी हैं? वहाँ, लाइब्रेरी में, गुमनाम चेहरों की भीड़, उम्मीद का एक अल्फाज़, जो फिर से बचा ले हमें। लायब्रेरी की चुप्पी में कई आशिक रंग-बिरंगी किताबों में खो जाते हैं, उनकी आंखों में यादों का झोंका आता है। हर पन्ना एक कहानी, हर शब्द का जादू, किसी के हंसने की गूंज, किसी की आँखों की चमक। यहां, नोकरी का दावा नहीं, बस कुछ पल, खुद के साथ, खो जाने का सफर। किताबें करती हैं बातें, धीरे-धीरे दिल की धड़कनों को सुनाती, और जो खो चुके, वे फिर से मिलते हैं यहाँ। लायब्रेरी दिल थाम लेती हैं इन आशिकों का सुस्त हवा में बसी किताबों की ख़ुशबू जैसे हर शब्द एक नई दास्तान है पन्ने पलटते हैं ठंडी में, अध्यायों की इमारतें, इश्क के ख्वाब बुनते हैं। खिडकियों से झलकता सूरज, रोशनी में रंग बिखेरता, किस्से जो सुनते हैं चुपचाप, हर कोने में बसी है यादों की छाया। यहां मोड़ पर खोई हुई हर बात, दिल की धड़कनें सधी रहती हैं, किताबों के बीच में छुपे हुए हैं अश्क और हंसी के रंग। उजड़ी हुई बस्ती में किसको ढूंढते हो, जनाब जब उजाला बहुत दूर है, छायाएँ बिखरी हुईं। बरबाद लोग, चुपचाप खड़े, किताबों के बीच धुंधले सपनों की तलाश में। हर पन्ना एक कहानी, हर शब्द एक आहट, क्या तुम समझते हो, ये विरानियाँ किसकी हैं? वहाँ, लाइब्रेरी में, गुमनाम चेहरों की भीड़, उम्मीद का एक अल्फाज़, जो फिर से बचा ले हमें। लायब्रेरी की चुप्पी में कई आशिक रंग-बिरंगी किताबों में खो जाते हैं, उनकी आंखों में यादों का झोंका आता है। हर पन्ना एक कहानी, हर शब्द का जादू, किसी के हंसने की गूंज, किसी की आँखों की चमक। यहां, नोकरी का दावा नहीं, बस कुछ पल, खुद के साथ, खो जाने का सफर। किताबें करती हैं बातें, धीरे-धीरे दिल की धड़कनों को सुनाती, और जो खो चुके, वे फिर से मिलते हैं यहाँ। लायब्रेरी दिल थाम लेती हैं इन आशिकों का सुस्त हवा में बसी किताबों की ख़ुशबू जैसे हर शब्द एक नई दास्तान है पन्ने पलटते हैं ठंडी में, अध्यायों की इमारतें, इश्क के ख्वाब बुनते हैं। खिडकियों से झलकता सूरज, रोशनी में रंग बिखेरता, किस्से जो सुनते हैं चुपचाप, हर कोने में बसी है यादों की छाया। यहां मोड़ पर खोई हुई हर बात, दिल की धड़कनें सधी रहती हैं, किताबों के बीच में छुपे हुए हैं अश्क और हंसी के रंग। लायब्रेरी की शांति रोने नहीं देती, कलम की खड़क से, किताबों के आलिंगन में, शब्दों की सिसकियाँ, गूंजती हैं मधुरता से। हर पन्ने पर है कहानी, चुपचाप सुनती हैं दीवारें, समय थम जाता है, मानो हर आहट, रुक जाती है शांति के पास। मैं बैठा हूँ यहाँ, स्वप्नों की गहराई में, कभी मुस्कान, कभी आंसू, पर लायब्रेरी की शांति, रोने नहीं देती।लायब्रेरी की शांति रोने नहीं देती, पुस्तकों की गोद में, खामोशियों की चादर, हर शब्द में सहेजा एक सपना। दीवारों पर लिखे विवेक के सूत्र, और छत के नीचे सपनों की आहट। जब दुनिया की हलचल आस-पास गूंजती, यहां, ठहराव में, उम्मीद की गर्मी। सन्नाटे में लिपटी एक नई शुरुआत, लायब्रेरी की शांति बंदूक नहीं, पर झाझोटड़ की ताकत हैं।
9 months ago
9 months ago