Archana Singh 28 Sep 2024 कविताएँ समाजिक मांँ - बेटी 7693 0 Hindi :: हिंदी
बेटियों के लिए मायका क्या है ,,,,सिर्फ वही जानती है । बिन मांँ- बाप मायका सूना है । आज एक मांँ बेटी के एहसासों को लिख रही हूं .... मांँ हैं तो कहती है ; तू ठीक तो है ना .... ? कितने दिन हो गए तुझे देखे हुए ,,,,, आज तेरी आवाज थोड़ी भारी लग रही है , तू रो रही थी क्या ....? देख मुझसे झूठ मत बोलना । माँ है तो कहती है ; इस बार तेरे जन्मदिन पर पैसे भेज रही हूं , तो सिर्फ अपने लिए ही कुछ अच्छे कपड़े खरीद लेना । थोड़ा बन संवर के रहा कर ,,,अभी कौन सी तेरी उम्र हुई है .....! माँ है तो कहती है ; इस बार आना तो कुछ दिन मेरे पास रहना । क्या घोड़े पर सवार होकर आती है और तूफान की तरह मेरा आंगन सुना कर चली जाती है । अभी तो त्योहारों के चक्कर में तुझे जी भर के देखा ही नहीं , पता नहीं फिर कब आएगी ...! माँ है तो बेटियों के इंतजार में हर आंगन है । माँ है तो अधिकार है , ममत्व का एहसास है । माँ है तो सब कुछ है , मांँ के बिना तो हर बेटी का एक कोना सुना है ....एहसास अर्चना की कलम से ,✍🏻