Chanchal chauhan 01 Aug 2023 कविताएँ बाल-साहित्य 8353 0 Hindi :: हिंदी
मेंहनत जीवन का सार, ना जाती हैं बेकार, सब कष्टों का उपहार, मेंहनत बिन जीवन बेकार, बिन बीज बोये ना पौधा उगा पाया हैं, बिन मेंहनत के ना सफल हो पाया हैं, छोटी सी चींटी मेंहनत करके खाती हैं, एक महा की मेंहनत दूसरे महा में खाती हैं, सिखाती है मेंहनत करना, गिरकर बार बार उठती है ,
Mera sapna tha apne bicharo ko logo tak phunchana unko jiwn ki sikh ,prerna dena unmai insaniyat jag...