Alok ks 30 Dec 2025 कविताएँ अन्य कविता, हिंदी, poetry, shayari, love 11676 0 Hindi :: हिंदी
बहुत सुन ली है लोगों की नसीहतें, चाहे जो भी हो जाए अब बनानी है शख़्सियत। दिल मेरा रहा, ना मेहरबानी है किसी पर, वो ख़ुद बनाए रखें अपना ज़ेहन और हैसियत। नहीं है हमे अब किसी से कोई नायत, मेरे दस्तख़त से ही है मेरा कैलिबर।