Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

परिवार

संदीप कुमार सिंह 04 Jun 2026 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाजिक है. परिवार से समाज बनता है.अत:समाजिक प्राणी का दायित्व सबसे पहले अपने परिवार के प्रति समर्पित रहें. कितना भी सुख क्यों न मिले लेकिन अपने परिवार को नहीं भूलें. 853 0 Hindi :: हिंदी

मुक्तक 
भूलें  मत  परिवार  कभी  भी,रखिए  हरदम  याद l
मन्दिर   है परिवार सभी  का,नित्य  करें  संवाद l
सेवा  ही  साधना बड़ी   है,धर्म  ही  है  कर्म=
मुश्किल  राहों पर  चलना  है,रहना  है  आबाद ll
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह*Author*

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: