संदीप कुमार सिंह 04 Jun 2026 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाजिक है. परिवार से समाज बनता है.अत:समाजिक प्राणी का दायित्व सबसे पहले अपने परिवार के प्रति समर्पित रहें. कितना भी सुख क्यों न मिले लेकिन अपने परिवार को नहीं भूलें. 853 0 Hindi :: हिंदी
मुक्तक भूलें मत परिवार कभी भी,रखिए हरदम याद l मन्दिर है परिवार सभी का,नित्य करें संवाद l सेवा ही साधना बड़ी है,धर्म ही है कर्म= मुश्किल राहों पर चलना है,रहना है आबाद ll (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....