Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

क़ातिल और क़त्ल से शाम

प्रवीण कुमार 09 Oct 2025 कविताएँ दुःखद 4065 0 Hindi :: हिंदी

क़ातिल और क़त्ल से शाम 
डर है हमें।
सुबह भी ज़ालिम क़ातिल न हो जाए।
इसलिए इस मिट्ठे पानी की अदा पर
हम यकिन कर बैठेंगे।
क़ातिल और क़त्ल से शाम 
डर है हमें।
राम ही ने हराम कहा, रावण को।
ज़माने ने तो विद्वान कहा।
इन्सान ने इन्सान को बदनाम किया।
जो संसार की आदि-शक्ति बनी आज
औरत ने ही औरत को 
इन्सान की बड़ी कमी कहा।
क़ातिल और क़त्ल से शाम 
डर है हमें।
औरत ने ही औरत के विश्व़ास को थोड़ा है।
ये कामयाबी कैसी है? 
बस, समय ही तो चल पड़ा है ।
एक बात है जो अपने -आप में अधूरी है 
साथ ही इसका निर्णायक मैं भी नहीं।
क़ातिल और क़त्ल से शाम 
डर है हमें।

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: