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सब कुछ बोल गई

शरद भूषण मोंगरा 07 May 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत 636 0 Hindi :: हिंदी

"पीपल वाली भूतनी" 
चाय की दुकान पर 4,5 दोस्त खड़े आपस में बात कर रहे हैं राम, श्याम,बंटी,पिंटू,गोलू 
राम - अरे यार कल मैं दोपहर में उस जंगल वाले पीपल के पेड़ के पास से होकर गुजर रहा था तो वहां से मुझे डरावनी आवाज आने लगी मैं तो बिल्कुल घबरा गया और पानी पानी हो गया ऐसा लग रहा था जैसे कोई मेरे पीछे ही आ रहा है 
श्याम - राम तुम्हें नहीं पता उस पीपल के पेड़ के नीचे एक भूतनी का वास है वह दोपहर में और रात में घूमती फिरती दिखाई देती है रात में तो वह पायल पहन कर निकलती है 
(पास में ही एक दूध वाला था वह बोला)
 दूध वाला - ठीक कहा बाबूजी आपने कल की ही बात है मैं मुंह अंधेरे वहां से निकल रहा था तो किसी ने मेरी साइकिल पकडकर खींची और मैं गिर पड़ा तभी मैंने माचिस जलाई और भगवान का नाम जपते जपते  किसी तरह वहां से बाहर आया।
 गोलू - तुम सब क्या बकवास कर रहे हो भूत वूत कुछ नहीं होता
 राम - नहीं गोलू हमने उसका डर महसूस किया है 
गोलू - अरे नहीं ऐसा कुछ नहीं होता 
बंटी - ऐसा कुछ नहीं होता 
गोलू -नहीं बिल्कुल नहीं 
(गोलू एक मोटा सा कॉमिक्स किरदार है)
बंटी (गुस्से से) - तो ठीक है कल हम सभी लोग रात में उस पीपल के नीचे चलेंगे गोलू को लेकर और गोलू सबसे पीछे चलेगा (अब गोलू को डर लगने लगता है)
गोलू (डरते हुए) - रात में क्यों  दिन में चलेंगे 
श्याम - (हंसते हुए) ओके दिन में ही सही 
दूधवाला - ठीक है भाई जी मैं भी चलूंगा और हां एक बात याद रखना यदि किसी को डर लगने लगे तो हनुमान चालीसा का पाठ करते रहना 
(सभी लोग दूसरे दिन वहां जाते हैं, सभी डरे होते हैं और गोलू झट से पीछे चलते चलते आगे खिसक आता है वह ऐसा कई बार करता है पीपल के पेड़ के नीचे पहुंचकर गोलू डरता हुआ बोलता है)
गोलू - तुम तो कह रहे थे यहां भूतनी है यहां तो कोई भी नहीं है बताओ कहां है भूतनी (जब कुछ दिखाई नहीं देता सभी लोग घर की तरफ चले जाते हैं) अगले दिन अगले दिन गोलू की साली घर आ रही होती है 
साली - जीजा जी घर से फोन आया है कि आज ही घर आना है रात 10:00 बजे की गाड़ी है 
गोलू की बीवी - तो ठीक है तेरे जीजा जी छोड़ आएंगे गोलू हां हां छोड़ आऊंगा इसमें क्या बात है पर रात को ।
बीवी - क्यों रात को क्यों नहीं 
गोलू - नहीं नहीं छोड़ आऊंगा
(जब यह लोग जा रहे होते हैं तो बादल उमड़ने लगता है और  जब गोलू अपनी साली को ट्रेन में बिठा कर आ रहा होता है तो देखता है कि जिस रास्ते से आया है वह पूरा पानी से भरा है अब वापस जाने के लिए पीपल वाला रास्ता ही था वह वहां से जाने लगा 
गोलू - अरे सारे रास्ते में पानी भर गया (गोलू डरता है) दूसरा कोई रास्ता नहीं है उस दिन तो भूतनी मिली नहीं थी शायद आज मिल जाए अरे जब उस दिन नहीं मिली तो आज कहां से मिल जाएगी, गोलू मन में सोचता है वह लोग झूठ बोलते हैं यह सोचता सोचता वह पीपल वाले पेड़ के नीचे पहुंच जाता है जैसे ही वह वहां पहुंचता है तो उसे डर लगने लगता है कि तभी डरावनी आवाजें आती है 
फिर एक औरत की आवाज आती है आ गए हो मैं 2 दिन से तेरा इंतजार कर रही हूं 
गोलू  -  (डरते हुए ) 2 दिन से क्यों
आवाज - क्योंकि 2 दिन पहले तुम कह कर गए थे कहां है भूतनी ..... वो सब झूठ नहीं बोल रहे थे अब आओ मेरे पास मेरे साथ चलो मैं तुम्हें लेने आई हूं (जैसे ही भूतनी गोलू का हाथ पकड़ने वाली थी तभी गोलू को हनुमान चालीसा वाली बात याद आ जाती है और वह हनुमान चालीसा का पाठ करने लगता है पाठ करते करते उसकी आवाज से तिरंगे निकलनी शुरू हो जाती हैं जिससे भूतनी उसका कुछ बिगाड़ नहीं पाती और धीरे-धीरे उससे पीछे हटने लगती है इस तरह वहां से गोलू अपनी जान बचाकर जंगल से बाहर आ जाता है 
आवाज - आज तो तुमहें हनुमान चालीसा के पाठ ने बचा लिया नहीं तो आज मैं तेरा काल बनकर आई थी।

लेखक/ गीतकार
शरद भूषण मोगरा

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