Afsana wahid (moin raza ghosi) 30 Jul 2025 कविताएँ अन्य Afsana wahid, story,artikal, shairy,blog writer, content writer, etc 5368 0 Hindi :: हिंदी
थोड़ा और रुक जा… थक गई हो न? चलते-चलते पाँव जल गए हैं, सपनों के रास्ते धुँधले लगने लगे हैं। पर ज़रा ठहर… क्योंकि सफ़र का ये अँधेरा मंज़िल का ना होना नहीं है, ये तो बस तूफ़ान से पहले की ख़ामोशी है। हर रात जो रुलाती है, वही सुबह तेरे लिए नई रौशनी लेकर आएगी। लोग अभी नहीं देख रहे, पर कल देखेंगे— तेरे शब्द, तेरी मेहनत, तेरी लगन की आग को। जो बीज आज मिट्टी में दबा है, वही कल फूल बनकर दुनिया का ध्यान खींचेगा। इसलिए— रो लेना, पर रुकना मत। गिर जाना, पर हारना मत। क्योंकि तू जितनी बार गिरी है, उतनी बार खुद को नया बनाती है। एक दिन, यही दुनिया तेरे नाम की कहानी पढ़ेगी। तुम्हारे अंदर बहुत ताक़त है, थोड़ा और धैर्य रखो। धीरे-धीरे सब बदल जाएगा। Writer Afsana Wahid