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वातावरण

Bholenath sharma 18 Jul 2023 कविताएँ समाजिक वातावरण के बारे में 6270 0 Hindi :: हिंदी

प्रकृति का ये सुंदर दृश                                 भूधर, अरण्य , नदतीर ।                            अनुराग रहित जल बहता है                                हर सिन्धु समीर ।                                      भीनी ब्यार चलती है                                 अब स्वछन्द होकर ।                                     वह आती है अन्नत                                     पथ से होकर ।                                      अविरत अथक वो                                      बहती कोने कोनो मै                                                         कभी मद्धिम गति                                     कभी तेज आती है होकर |

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