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माँ तेरी जमी पर
कितनो ने दी अपनी बली|
ना सोच्या ना समज्या बस
दिया सात सत्य और अहिंसका|
मेरी भारत माँ है
लाखो मे एक जाहा
ना हे को� read more >>
कविता -कृष्ण बाल लीला
अब आन बसौ मोहन मन में, तेरी सूरत मन को भावत है। बचपन में तू जीवन की सबै, खूब लीला करत दिखावत है।|
ठुमकत चलत बजै पैज� read more >>