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गुरु ज्ञान का सागर
कविता का शीर्षक- गुरु ज्ञान का सागर वंदन है मेरे गुरु का, अभिनंदन है गुरु का। गुरु ज्ञान का सागर, वाणी चंदन है गुरु का।। भवसागर पार कर�
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लक्ष्य भेद
कविता- लक्ष्य भेद चाहे बनी हो दीवारें लोहे की, जो हो चाहे अकाट्य अभेद। मेरी प्रतिज्ञा दृढ़ संकल्पित है, एक दिन करूंगा लक्ष्य भेद।। �
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मेरे हमदम
बड़ी मुश्किल से दामन बचाकर आया तेरे पास मिला न तुम मुझे ,मिली हमे मौत
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तुझसे
दिल बार - बार तुझसे यही इल्तिज़ा करे दूर जाना हमसे ,पर अपने दिल में पनाह हमें ही देना। धन्यवाद
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
सब एक दूसरे के बुराई में लगा हुआ है,लेकिन अपने किरदार के दाग को छुपाए हुए है।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
किस दोस्ती की बात करते है लोग,जब मोहब्बत बिक सकती है तो दोस्त क्यों नही।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
मोहब्बत गिरवी रख कर वफा ढूंढ रहे है लोग।
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🙌 प्रार्थना 👏
दो दान दया का दया निधे:, हम शान आपका गाऐंगें! दो ज्ञान अचल हे! महा ऋषी, गुणगाण आपका गाऐंगें!! है दया धर्म का मान रहा, भक्ती -
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
दोस्त मोसीबत में दुनिया स्वाद लेती है। लेकिन तरक्की करोगे तो हेट मिलेगी।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
मूड ऑफ ही रहता है शाहब,क्योंकि शुकून ढूंढ़ता हूं तो वेचैनी बढ़ जाती है।
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🙏 हे! राम 👌
चाहत को मिलें आशां कि किरण, ज्यों मिलें प्रभा से अंधकार! त्यों ज्ञान ल्लक से मिलती हैं, होता कल्याण का सृजनहार!! हे! राम – राम, ह
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मेरी जिंदगी
मेरे पहले कि दास्तान, अब बदली सी लगने लगी हैं। जिस शाम तन्हाई सताती, वह फूलों से महकने लगी हैं। जहाँ अकेले तारे गिनना मुश्किल था, अब यह
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