मेरे मन की तू आवत्री, मेरे घर की तू सावत्री
कभी निंदो में आती है, कभी बातो में बहाती है|
नजर अंदाज कर सोचे तो तेरी याद आती है
कभी तू तन को � read more >>
जिंदगी जीते -जीते आज हम कहां खड़े हुए
कोई खुशी नहीं है ,आज हम वहां खड़े हुए
वक्त की रफ्तार में,हम भी तेजी से बढ़ गए
पर वक्त ठहरा नहीं ,पर ह read more >>
पादाकुलक छंद "राम महिमा"
सीता राम हृदय से बोलें।
सरस सुधा जीवन में घोलें।।
राम रसायन धारण कर लें।
भवसागर के संकट हर लें।।
आज समा� read more >>