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सिर्फ ऐसे हो तुम
चाँद की चाँदनी जेसे सूरज की किरने जेसे धरा की छांव जेसे अम्बर की शान जेसे सिर्फ ऐसे हो तुम /
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अदा रूठ जाने की
मेरी सारी कोशिशें नाकाम हो रही हे तुम्हें मनाने की कोई और सिखाता हे क्या अदा रूठ जाने की /
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कोशिश करता रहूँगा
कोशिश करता रहूँगा तुम्हें मनाने की कोई अदा मत सीख जाना रूठ जाने की /
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रूठ जाना हमारी फितरत मे नहीं
रूठ जाना हमारी फितरत मे नहीं मुस्कूराना हमारी फितरत मे आसान लगता हे, जब कोई अपना रूठे उसे मनाना हमे अच्छा लगता हे /
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कभी-कभी मन में एक सवाल आता है
कभी -कभी में सवाल आता है, मतलब की दुनिया मतलब के लोग, कहां रह गये अपने , कौन अपना कौन पराया, अपनेपन का कहां है बोल।
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जिंदगी की रेस
जिंदगी की रेस में हम पीछे हैं रह गए, लोग निकल गई आगे, हम उनको देखते रह गए, अनजाने थे नादान थे, हमेशा सीधी रास्ते पर चलते रहें।
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पल-पल बदलती है जिंदगी
पल-पल बदलती है जिंदगी, वक्त के साथ ढलना सीखना, हालात कैसे भी हो, टूट कर ना बिखरना, दूसरा सहारा देंगे उम्मीद छोड़ देना, खुद को संभाले रखन�
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खुद पर भरोसा
खुद पर ही भरोसा करना, यहां कोई नहीं देता बुरे वक्त में साथ, खुद ही हालातों से निकलना सीखना, किसी से कोई उम्मीद ना करना।
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*स्वातंत्र्य राष्ट्र*
*स्वातंत्र्य राष्ट्र* जाने कितने वीरों ने अपनी जान गवाई होगी, तब जाकर के भारत ने आजादी पाई होगी, भारत की माटी का शत-शत वंदन करते हैं ब�
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दावत
मैं दावत खाने बैठा था कौन अपना कौन पराया मैं खुद अंजान कौन बिन बुलाए मेहमान किन्तु प्रेम का संगत अनूठा था, देख देख कर एक दूसरे को पू�
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संपर्क
कविता-संपर्क क्यों टूट जाता है संपर्क दूरी बन जाता है सदा के लिए अपनों से, देखा है लोहे को तैरते नाव के संपर्क से अथाह गहरे हौसलों स
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जिक्र भी होगा और फिक्र भी होगा
ज़िक्र भी होगा तुम्हरा ,फ़िक्र भी होगा तुम्हारा जिस दिन माँ न होगी घर मे,वो घर भी मंदिर ना होगा तुम्हारा ये जो करीब का रिश्ता ,गरीब
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