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न शौक, न श्रृंगार ,न इच्छा न चाह हो, न दु:ख हो न दर्द हो,कठिन भले ही राह हो, तेरे बिना रहना कैसा?भाये भला तनहाइयां? बनकर सदा चलता रहूं ,अमिट � read more >>
आज दिन में धूप थी कुछ तेज ज़्यादा क्यों ? कदाचित... धूप के ये सूक्ष्म कण मानों पसीने के कणों से मिल बने कुछ खेत में, कुछ कारखानों में तथा � read more >>
शीर्षक- बढ़ते कदम मुसाफिर! तान ले यदि तीर अपना मंजिल की ओर सोंचकर उम्मीदों पर खरे उतर रहे हम , दुनिया तुम्हारा नाम क्यों याद � read more >>
Kya Zindagi Tu Kis Talash me hai Pta kr...Tu kahi aas pass hi hai read more >>
दुनिया तो वैसे भी छुटी दिल से निकालो मत अभी ज़िंदा हूँ मुझपर रोज़ आकर फूल डालो मत अभी।। मैं मर गया तो ठीक है इतना रहम तो तुम करो मेरी चित� read more >>
कुछ भाव सिर्फ़ देकर दिल जीत ले तू मेरा फिर अर्थ धन भला क्यों है सामने बिखेरा।। जो भक्ति दिल से करते , झोली में पुण्य भरते दिल से लगा लूँ � read more >>
ये बातें और रो रो कर नयन से जल बहाया है स्वयं गिर गिर के लोगों को मग़र हमने हँसाया है।। ये रस्ता जा रहा किस ओर हमने पूँछ कर देखा गए कर पा read more >>
रात को अकेले में ये विचार करता हूँ क्या मैं आज बचपन के उन ही बंदरों सा हूँ।। रोज़ खेलते, कूदते और साथ पिटते थे दूध से बनी रबड़ी पे दो ह� read more >>
कई जन्मों का आज संगम करेंगे, विचार और मंथन करेंगे, आर और पार की लड़ाई करेंगें, जीत का बिगुल फुकेंगें। ना कोई हम से टकराना, हम हैं खतरना� read more >>
एक गांव में दो परिवार रहेते थे।👬 जिनमे बहुत घना मिलाब था। वे एक दूसरे के लिए अपनी जान देने को तैयार रहते थे। उनकी यह घनिष्ठा देख कर लो� read more >>
धूप और छांव जिंदगी का हिस्सा हैं, दुःख और सुख जिंदगी के पहलू हैं, हर हाल में जीना,हर परिस्थिति से निकलना हैं,ये ही जीवन जीने की कला हैं। read more >>
लघुकथाःः वर्क एट होम साधना वर्क फ्राम होम से निपटी और निढाल होकर बिस्तर पर पड़ गई। तभी उसका दस वर्षीय बेटा कहीं से आया और मैगी की फरमाइ� read more >>
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