मैं आदमी असरदार हूं
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मुझको नहीं फिकर कोई
न जीत की न हार की
बस एक ही डगर चला
सेवा समर्पण प्यार की
छल छिद्र कपट से परे
मुश्किलों � read more >>
इस कदर बह रहे थे हमारी आँखों से आंसू,
रोके न रुक रहे थे हमारी आँखों से आंसू,
जब वो किसी ओर कि होने जा रही थी,
तो आंसूओं की मेहमानावाज़ी भी � read more >>
यूँ न देखा कर मुझ को,
मे महसूस कर रहा हूँ कि,
तेरी नज़रे मुझमें डुबकर,
मुकम्मल होना चाह रही है,
और यह मुमकिन न हो पाएगा,
में तेरे बिना हि म� read more >>