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रिश्तों का नाम-कभी कभी कोई रिश्तों का नाम नहीं होता
कभी कभी कोई रिश्तों का नाम नहीं होता पर दिल में एक एहसास बेशक पनप जाता है और वही एहसास अंजान से रिश्ते को भी बांध कर रखता है
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गम-तेरा गम को पूछने वाला कोई भी नहीं
गम तू अपना छुपा लें कहीं तेरा गम को पूछने वाला कोई भी नहीं धन्यवाद
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शिकायत हम अब उनसे करते नहीं है-मोहब्बत में हमने बहुत कुछ सहा है
शिकायत हम अब उनसे करते नहीं है करते भी क्या जिनको परवाह नहीं है मोहब्बत में हमने बहुत कुछ सहा है आंखों से शबनम अब बहता नहीं है छोड़ द�
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किसी का वक्त ही सहारा होता है-तो कोई वक्त का ही मारा होता हैं
किसी का वक्त ही सहारा होता हैं। तो कोई वक्त का ही मारा होता हैं। दुखों के शहर में खुशी का एक आशियाना होता हैं। कितनी भी इमारतें हो दुन�
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परमात्मा की सत्ता को ना मानने वालो के लिये-परमशक्ति परमात्मा या फिर आप
परमशक्ति परमात्मा या फिर आप उसको | कोई भी नाम दे सकते है । परमात्मा ने हमें | मनुष्य बनाया और सारे रास्तों के बारे मे ब | ताया, कौन सा रास्त
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मतलब से बढ़कर कुछ नहीं यहां -न इंसान न भगवान
झूठी है यह दुनिया सारी, यहां कोई ना समझे पीर-पराई। मतलब से बढ़कर कुछ नहीं यहां, न इंसान, न भगवान। मतलब से सब प्यार, मतलब से सब यार। मत�
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हरी भरी प्रकृति छाई हरियाली -बागों में फूल खिले हैं कलिया मुस्कुराई
हरी भरी प्रकृति, छाई हरियाली , बागों में फूल खिले हैं, कलिया मुस्कुराई, टप टप टपकी बूंदें, पत्ते पत्ते पर हरषाई, तितली फूलों पर मंडराई,
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राजनीति में धर्म का-भारत में है झूठ
(दोहा छंद) राजनीति में धर्म का,भारी अभी अभाव। लाठी के बल भैंस है,फैली अजब दुराव।। राजनीति में धर्म अब,भारत में है झूठ। कथनी करनी सम नह�
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जीवन के दस्तूर है-सुख दुख का यह मेल
(दोहा छंद) जीवन के दस्तूर है,सुख दुख का यह मेल। यहां खुशी तो गम वहां,रखें नियम सम जेल।। कोई राजा है यहां,कोई रहे गरीब। जीवन के दस्तूर ह�
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मीरा जैसी प्रीत जब करे जगत के लोग- घर घर में खुशियाँ रहे होगा कभी न रोग
(दोहा छंद) मीरा जैसी प्रीत जब,करे जगत के लोग। घर घर में खुशियाँ रहे,होगा कभी न रोग।। अमर कहानी भक्ति की,जाने घर घर आज। मीरा जैसी प्रीत प
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मिले न ज्यादा भाग्य से-इसका रखें विचार
(दोहा छंद) मिले न ज्यादा भाग्य से,इसका रखें विचार। आगे जो है भाग्य से,ऐसा यह संसार।। मिले न ज्यादा भाग्य से,सबका यहां नसीब। जिसकी जैसी
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आँखों में चाहत बढ़ी-आए भव्य विचार
(दोहा छंद) आँखों में चाहत बढ़ी,आए भव्य विचार। शहरी रौनक देखकर,हृदय हुआ अति गुलजार।। शहरी रौनक देखकर,कंगन खनकी कान। तन मन मुग्ध सितार �
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