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रूह-लोग मोहब्बत् में रह के रुह मे उतरने की बात करते हैं
"रूह" "लोग मोहब्बत् में रह के रुह मे उतरने की बात करते हैं, पर पता नहीं,रूह मे उतरते है की नहीं,पर जिस्म में उतर ही जाते है" #Mukesh Namdev
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गौरैया-मेरे आंगन में फुदकती गौरैया
"मेरे आंगन की गौरैया" मेरे आंगन में फुदकती गौरैया। मन को भाती दिल बहलाती। चुं -चुं कर पास हमें बुलाती । करती बड़ी उछल कूद शैतानियां।
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जो क़दम बढ़ा लिया तो अब चलो -रुको नहीं हटो नहीं अब डटो
जो क़दम बढ़ा लिया तो अब चलो रुको नहीं हटो नहीं अब डटो🌹 जो तुम लौट आओगी 🌹यकीन मानिए बड़ी पछताओगी🙏 बेटी हो तुम मजबूर नहीं मंजिल ते�
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रंग रूप से दोस्ती ना करे-दोस्ती करें मन से
रंग रूप से दोस्ती ना करे, दोस्ती करें मन से, निभाओ दिल से ।
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एक की दूरी काफी थी-मुझे दर्द देने के लिए
एक की दूरी काफी थी मुझे दर्द देने के लिए तुझसे मोहब्बत करके हमने दूजी भी पाल ली धन्यवाद
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फरिश्ते बनकर आए थें-तुम मेरी जिंदगी में
फरिश्ते बनकर आए थें तुम मेरी जिंदगी में अब नासूर बन गई तेरी मोहब्बत
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ए कौन सा मंजर है जिंदगी का -जिसमें हम उलझते ही जा रहे हैं
ए कौन सा मंजर है जिंदगी का जिसमें हम उलझते ही जा रहे हैं जितना निकलना चाहा उतना ही फंसते जा रहे हैं धन्यवाद
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मोहब्बत ना करो हमसे यारा- इतनी सी गुज़ारिश है
मोहब्बत ना करो हमसे यारा इतनी सी गुज़ारिश है मोहब्बत में बहुत दर्द और तकलीफ मिलती है और हमें तो सुकून की तलाश है
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दर्द जो तुमसे हमको मिली-भुलाकर भी भुलाया ना जा सकी
दर्द जो तुमसे हमको मिली भुलाकर भी भुलाया ना जा सकी जो जख्म मिली है तुमसे उसका दवा कहीं भी ना मिली मुझे हार गई मैं खुद से इतना प्यार कि�
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हिंदी की खूबसूरती-अपनी भाषा का गर्व
सूरज की किरणों में चमक और है, चांदनी की चमक में बहार है। चिड़ियों की गोते देख लो, प्रकृति की सुंदरता बेकार है। वह नदी का पानी शानदार ह�
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उलझ सी गई है जिंदगी हमारी-आंखों में है आंसू हमारे
उलझ-सी गई है जिंदगी हमारी, इन उलझनों को हम सुलझाएं कैसे? उलझनें है धागों-सी, बड़ी गांठों को सुलझाएं कैसे? आंखों में है आंसू हमारे, आंस�
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अग्नि भी शर्मा गई- चार जबाजों को देखा हमने
काव्य रचना - अग्नि भी शर्मा गई चार जबाजों को देखा हमने लथ पथ आग बुझा रहे थे, सैकड़ों की भारी भीड़ में मुर्दे रिल्स बना रहे थे। देख पत�
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