कविता = ( दिल्ली )
अंधी मूकबधिर अब हो गई दिल्ली !
दिल्ली का यह क्या हाल हो गया !!
असहाय, बेबस पिता लाचार हो गया !
पिता के ही सामने बेटा लाश ह read more >>
प्रिय!
इन बदलती हवाओं के रुख के!
साथ मैं भी कुछ बदलती जा रही हूं!
मैं भी समय के साथ कदम! मिलाकर कुछ दूर चलती जा रहा हूं !
पर यह न सोचना यह स� read more >>