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(दोहा छंद) सदा लक्ष्य हो प्रगति का,रखता हूं मैं ध्यान। करता अथक प्रयास मैं, बढ़ता मेरा ज्ञान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिल� read more >>
(मुक्तक छंद) कलाकार वो खूब,रहे जिसमें दृढ़ मस्ती। जाऊं उसमें डूब,मगर डूबे मत कस्ती। रखूं जिया में लाज,रहूं दुनिया में मिलके_ संगी दुश� read more >>
(दोहा छंद) दुर्गम करतब मैं करूं,बालाजी हैं साथ। करते संकट दूर सब,रखकर सिर पर हाथ।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर( read more >>
(दोहा छंद) खोया सपना में रहूं,मिले अत्यधिक हर्ष। करता सतत प्रयत्न मैं,प्राण करे उत्कर्ष।। अपना अपना ख्याल है, जीवन है संग्राम। सावधा read more >>
हाय, मैंने यह कब, क्या कर दिया? मैं तो मां बनाया था, सीने में इतना त्याग, किसने भर दिया? इतना सोचकर खुदा, ग़म खा गया, पन्नाधाय बनाने की, आग� read more >>
(दोहा छंद) उपजा मन अनुराग जो,किया याद सब नात। बातें करकर सुख मिला,हुआ कांत मय गात।। समय सुहाना अब हुआ, उपजा मन अनुराग। आती सुखकर अब निद read more >>
(दोहा छंद) बेटी है अनमोल अति,जिससे है संसार। धरा दिव्य गुलजार है,इनको भी दो प्यार।। मातु पिता की लाडली, बेटी है सौगात। इनको खुशियाँ दे read more >>
(दोहा छंद) टूटे बांध विकास के,हुए नागरिक मूक। राम भरोसे चल रहा,दिखे नहीं निज चूक।। टूटे बांध विकास के,छाए बादल भ्रष्ट। जनता में अति छो read more >>
बूंद बूंद से घड़ा भरता है, बूंद बूंद से सागर, मेंहनत का एक एक रुपया जोड़िये, भर जायेगी गागर। read more >>
जिंदगी का सबक, वक्त से सीखा हमने, अपना कमाओ, अपना खाओ, दूसरों के पैसों पर निर्भर मत रहना। read more >>
आज का काम, कल पर क्यों छोड़ दूं , मेरा वक्त आने वाला है उसे दो पल के आलस से क्यों रोक दूँ...।। read more >>
प्यारी होती हैं बेटियां, घर आगन का फूल होती हैं बेटियां, करती हैं मीठी मीठी बातें, सबके चेहरे पर मुस्कान लाती हैं बेटियां, हंसती हैं � read more >>
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