काफिया:_आनी
रदीद:_आज फिर
बहर:_2122,2122,2122,212
गीत गाता हूं नई अरु, मुंह जुवानी आज फिर।
साज बन कर गमकती है, जिंदगानी आज फिर।
लोग सारे प्यार करते,� read more >>
बहर:_2121,1212,22
काफिया:_आए
रदीफ:_हैं
गज़ल
आज शाम नरम हवाए हैं,
बेरुखी म अदा जगाए हैं।
लोग आज मनों रगों में रख,
प्यार सिर्फ़ मधु आजमाए हैं।
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जब देखता हु कभी किसी को हर वक्त बस आप का ख्याल आता है
नजरो से नजरे तो मिलती है होठों पे बस एक तुम्हारा ही नाम आता है
सोचता हु की भूल जाऊ त� read more >>
जिन्दगी को महोत्सव की तरह जीना है,
हर गम को खुशियों से निकाल देना है।
बड़ी ही नियामत से यह जीवन मिला है,
पल _पल इसमें हसी की रंग भरना ही � read more >>