कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है !
ये तेरा दिल � read more >>
मैं ना धुंध हूँ ना राख हूँ,
जिंदगी है मौत से मैं मौत के ही पास हूँ ll
राज से द्रोह है ,
और दंश से मोह है ,
कंटको के बीच हूँ मैं
कंटको का लोभ ह read more >>
रोती छत-सिसकता फर्श
उस घर की टपकती छत ने,
घर के फर्श से कहा होगा-
कि माफ़ करना, हालत अभी बुरी है।
घर के गीले फर्श ने,
हँसते हूए कह दिया हो read more >>
सुनहरे पल जो गुजर गये हैं, उनकी यादें संजो रहा हूं।
आंखों की आदत है भीग जाना, मत समझना के रो रहा हूं।
कमल नयन थी जो आंखे, जाने कैसे यूं तन read more >>