महीनो बीत जाते है , ना कोई बात होती है
और ना कोई मुलाकात होती है!
फिर भी ये दोस्ती बरकरार रेहती है,
और अकसर बाट लेता है दिल के हर एक दर्द क� read more >>
# जिन्दगी .....
मध्यमवर्गीय जिंदगी ,
कर्जदारों की बंदगी
बंट गई है किश्तों में ,
आगे और कुछ नहीं ......!
चिन्ता नेताम " मन "
नगर पंचायत डों� read more >>
मंदिर में मूरत किस काम की है जब किसी के घर में रोटी ना शाम की है दिल दुखी है मन उदास है फिर पूजा किस काम की कोई रो रहारा मंदिर के बहार फिर � read more >>
हरी घास की गोब सी लहलाती हुई जो तुम आती हो,
हवा के झोंकों सी कुम्हलाकर, अचानक जो मुझे छू जाती हो
साँसे थामे रखता हूँ मैं, फिर भी मदमस्त क� read more >>