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हौसले
थक गया हूँ सफ़र में मगर रुकना नहीं सीखा, इन बुझते हुए ख़्वाबों को फिर से मचलने दो। रात ने छीन ली है चमक मेरी निगाहों की, सुबह बनकर उभरूँ�
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स्मृतियाँ
कभी किसी ने कहा था — “समय-समय की बात है…” पर शायद समय भी अकेला कहाँ चलता है, वह तो कारणों की अनदेखी धारा में अपना स्वरूप पाता है। एक नि�
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"પરસેવાનું મૂલ્ય"
નસીબના ભરોસે બેસી, તમે શું મેળવી લેશો? કૂવામાં બેસીને આકાશની વાતો, ક્યાં સુધી કરશો? તમારી આવડતને સાચવી રાખવાને બદલે, વાતવાતમાં શા મ�
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"આજની જીત"
વર્ષોના ફાંફા મારવા કરતા, આજમાં જીવી લે તું, ચોવીસ કલાકની શક્તિને આજે અજમાવી લે તું. ભવિષ્યનું ચિંતાતુર મુખડું અરીસે ન શોધ મિત્ર, આ�
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मदर्स डे
खुदा करे इस दुनिया में ऐसा दिन आ जाए, हर कोई बेपनाह मोहब्बत करे अपनी मां से, हर रोज ही मदर्स डे बन जाए।।
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सोशल मीडिया के कारण टूटते रिश्ते और परिवार
आधुनिक समय में सोशल मीडिया लोगों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म न
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'પુસ્તક અને જીવન'
પુસ્તકનાં પાનાંમાં ક્યાં આખી દુનિયા સમાય છે? અનુભવની ભઠ્ઠીમાં જ માણસ ક્યાં ઘડાય છે? ડિગ્રીઓનો ઢગલો હોવા છતાં મૂંઝવણ ઘણી છે, ઠોકર ખ�
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मदर्स डे
नमस्ते दोस्तों 🙏🏻🙏🏻 आज सभी जगह "मदर्स डे" के गाने बज रहे हैं । फेसबुक , इंस्टाग्राम , यूट्यूब , व्हाट्सएप इत्यादि ... सोशल मीडिया प्लेट�
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अर्ज ए उलफत
"अर्ज ए उल्फत" अब अर्ज ए उल्फत मान लो आहिस्ता आहिस्ता जब दिल तुम ही पर आगया आहिस्ता आहिस्ता। अब क्या करें क्या ना करें ये वक्त नहीं ह�
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मरहम जैसे शब्द
मरहम जैसे शब्द वो देख दूजे के ग़म दुख दर्द निकाल देता है। मुझे भीतर से मोम जैसा पिघाल देता है। मैं जब देखता हूं दर्द में डूबे किसी व�
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मालिक की मर्जी
कलंदर यूं नहीं बनता कोई बिना मालिक की मर्जी के, कि हस्ती भूलनी होगी अगर मस्ती को पाना है। शरद भूषण मोंगरा
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तुझे भूल जाऊं....!!
तुझे भूल जाऊं ऐसा मेरे बस में कहां...!! पर तेरा साथ निभाऊं ऐसी मेरी तकदीर कहां..!! धन्यवाद🙏🏻
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