MD SHAYEED ALAM 22 Nov 2025 शायरी समाजिक शायरी मोहम्मद सईद आलम 3123 0 Hindi :: हिंदी
ख्वाब देखना भी जरूरी है इस जहां में, ख्वाब ही तो जिंदगी का आईना है। पर ख्वाबों में ही मुत्मइन रहना मुनासिब नहीं, क्योंकि ख्वाबों से बाहर की दुनिया ही असल दुनिया है।।