Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

क्या जिन्दगी बोझ है।

Pinky Kumari 24 Dec 2024 आलेख समाजिक 56577 0 Hindi :: हिंदी

आज के समय में सभी को लगता है। की जिन्दगी बोझ है। या जीवन जीना ही बोझ बन गया है। और यह सत्य भी है। आखिर कमाने वाला कितना कमाये महंगाई बढ़ रही है। हर वस्तुओं के मुल्य  गिरने के बजाये दिन प्रति दिन बढ़ते जा रहे है। और खर्चे कि बन्द तो नहीं कहूंगी लेकिन कम होने के बजाएं मंहगाई की तरह बढ़ते ही जा रहें है। एक तरफ मंहगाई बढ़ रही है। दूसरी तरफ खर्चे भी बढ़ रहें है। और तीसरी तरफ है। कि जैब बढ़ने का नाम ही नही ले रही जैब (पॉकेट) भी बोल रही है। कि भईया इतने में ही मैनेज करो अब बिचारा है। तो इंसान ही  ना जिने के लिए करना पड़ता है। और करता आया भी है। कितना भी नोर्मल जीलो अगर आज के समय में कोई व्यक्ति  तीस हजार नहीं कमायेगा तो जिन्दगी बोझ लेगेगी ना यह तो पढ़ने लिखने के बाद है। मिलते है। शुरुवात में वो भी अगर उसको अच्छी नोलेज है। तो तभी ही सोचों अगर वो लोग जिन्होंने पढ़ाई नहीं कि हो उनका जीवन तो 30 हजार कमाने वालों से भी ज्यादा बोझ पूर्ण होगा कहते है। कि अगर जिना है। तो हमसे निचे रहने वालों को देखों यह बात सत्य भी है। आज के समय को देख कर यही लगता है। कि हमें ऊपर ना देखने कि बजाएं निचने देखना चाहिए क्योंकि ऊपर तो सिर्फ बढ़ती मंहगाई ही दिखाई देगी 

=> पहले शादी कर लेना एक जरूरी माना जाता था । या में कहु की एक परम्परा थी मेरे कहने का मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है की आज के समय में शादिया नहीं होती पर एक दबाव नहीं होता कि करनी पड़ेगी और आज के समय में शादीया क्या तो  अमीर लोगों कि होती है। या सरकारी जोब करने वालों कि होती है। और बाकी बच्चे लोगों की शादी एक समझोता बन कर रह गई है। या में कहु कि एक फांसी बन कर रह गई है। शादी करने से बच्चे पैदा करने से शादि का मतलब पुरा नहीं होता जीवन को कैसे जिना है। क्या गलत है। क्या सही है। झुठ और सच भविष्य को देख कर जीवन जिया जाता है। बच्चें तो जानवर भी पैदा करते है पर हम इंसान है। एक बच्चें के भविष्य के लिए क्या सही है। और क्या गलत यह एक माता - पिता को सोचना होगा 
क्योंकि जिस तरह हम देख पा रहे है। कि   बच्चे और जिस तरफ जा रही है। वह रास्ता उन्हें अन्धकार कि तरफ ले जा रहा है। यह बात हम अच्छी तरह से जानते है। पर कहीं ना कहीं इस बात में अपने निजी स्वार्थ के लिए नहीं बोल पा रहें है। आज के माता - पिता सब यही चाहते है। कि हमारा बच्चा फौन ना चलाएं पर यह बात हमेंशा माता - पिता बच्चों पर थोपते है। पर कभी यह सोचा है कि हम कितनी देर रहे  सकते है। फोन के  बगेर में यह बिल्कुल भी नहीं कह रही हूँ कि फौन छोड़ दो पर इसका इस्तेमाल कब, कहा , कैसे, और क्यों करना है। यह तो हम जानते है। ना पर नहीं हम सोचते है। बच्चा एक   कैसे ना कैसे करके पैसे छापने कि एक मशीन बन जाएं बस इस आड़ में हम अपने बच्चों का बच्चपना ही नही बल्की हर आयु उसे छिन रहे है। उम्र से पहले बच्चे बड़े हो रहे है। में यह नहीं कह रही हूँ कि यह गलत है। पर कभी - कभी यह गलत काम करता है। तो कही सही भी काम करता है। वो बच्चें कि सोंचने कि छमता पर निर्भर करता है। किस माहौल में रह रहा है। क्या देख रहा है। क्या सुन रहा है। क्या सोच रहाँ है। एक बच्चपना डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी का था। और एक बच्चपना  निब्बे निबियों का है। दोनों में अन्तर है। परिस्थियों पर निर्भर करता है। कि क्या सही हो सकता है। और क्या गलत 
में माननी हूँ कि सोशलमीडिया कि दुनिया ने हमारी आपकी जिन्दगी बदली है। और कुछ लोगों सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल करके अपने जीवन को नई दिशा दी है। चलों यह अलग बात है। मे भी ना क्या लिखते - लिखते आज के बच्चों कि कुण्डलिया देखने लग पेठी नाफी चाहती हूँ अगर किसी को बुरा लगा हो तो 
जिन्दगी तब बोझ बन जाती है। जब हम सही चलते - चलते ना जाने कब गलत रास्ता चुन लेते है। असल में कहूँ तो जिन्दगी बोझ नहीं है। अगर उसे सही और सादा तरीके से जिया जाये तो कहते है। ना कि कुछ लोग ऐसे होते है कि समस्या उनके पास नहीं जाती पर आज का युथ समस्याओ के पास खुद जाता है। यह बात कुछ अजीब लगेगी पर यह एक सत्य बात है। जब गोड़ी आपको चलानी आती है। और आप बिना किसी को जाने अपनी गाड़ी का हैंडोवर किसी और को द ेदेते और बाद में पता चलता है कि उसे  तो गाड़ी चलानी ही नहीं आती है। तो तो एक्सीडेंट होना तो पक्का है इसमें गलती हमारी है। अब हम बच्चें नहीं है। कि हमें यह सिखाया जाएं कि क्या गलत है। और क्या सही हमें खुद को ही समझना होगा क्योंकि यह जीवन कि गाड़ी है। जब तक ठोकर ,धक्का,गिरना ,उठाना आदि नहीं सिखेंगे तो जीवन बोझ लगेगा में मानती हूँ कि जीवन एक सिख है। पर हर सिख कि उम्र होती है। उसे उसी उम्र में सिख लिया जाएं तो जीवन बोझ नहीं लगता में मानती हूँ कि इंसान जवानी में ही दुःख पाले तो अच्छा है। जिसने जवानी में संघर्ष किया है। दुख देखा है। उसकी वद्धा अवस्था अच्छी जाती है। क्योंकि उसने अपनी पूरी उम्र मे सिर्फ अर्जित किया है बस अब सुख लेना है। तो हम कह सकते है कि जिन्दगी बोझ नहीं है। हमारे द्वारा किए जाने वाले कर्म ही जिन्दगी बोझ बनाती है। तो सिदा चलों सही चलों समझकर चलों जिन्दगी आसान लगती है। 🙏🙏🙏🙏🙏😅😅😅😂😂😂😂😂😂😂 हेपी 👍👍
धन्यवाद अगर यह लेख आपको पसंद आया हो मेंने पूरी कौशिश तो कि है। पर कहीं गलती कर बैठू तो समझा देना दिल से धन्यवाद और हाँ शब्दों में कोई त्रुटि हो तो एक छोटा जोक समझकर हंस देना क्योंकि हंसना भी जरूरी है।

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

छेड़ते हुए लड़के ने लड़की से कहा- तुम कितनी सुन्दर हो तुम्हारी आँखे तो ऐसी हैं जैसे समुन्दर हो तम्हारे होठ लाल ऐसे हैं जैसे चुकन्दर ह� read more >>
हमारे देश में बहुत से महापुरुष हुए, बहुत से नेता हुए जिन्होने देश के लिये अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिये, सिर्फ देश की एकता व अखण्डता क� read more >>
किसी भी व्यक्ति को जिंदगी में खुशहाल रहना है तो अपनी नजरिया , विचार व्यव्हार को बदलना जरुरी है ! जैसे -धर्य , नजरिया ,सहनशीलता ,ईमानदारी read more >>
Join Us: