Bholenath sharma 20 Jun 2024 शायरी समाजिक यहाँ सब एक है 21468 0 Hindi :: हिंदी
यहाँ सब एक है कोई पराया नही है हम बेवकूफ थे जो इनको , उनका दुश्मन समझ बैठे ।
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