कबीर परमेश्वर की अमृतवाणी कबीर, जिन हरि की चोरी करी, गये राम गुण भूल । ते विधना बागुल किये, रहे उर्धमूख झूल ।। कबीर परमेश्वर जी कहते है कि:- जो लोग मनुष्य जन्म पाकर सत् भक्ति नही करते वे बार बार गर्भवाश में आकर उलटे लटकते है तथा ऐसे जीवों के रुप में जन्म लेते

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कबीर, दर्शन साधु का, करत न कीजै कानि | ज्यो उद्धम से लक्ष्मी, आलस मन से हानि।। कबीर, सोई दिन भला, जा दिन साधु मिलाय। अंक भरे भरि भेटिये, पाप शरीरा जाय।। मात-पिता सुत स्त्री, आलस बन्धु कानि। साधु दर्श को जब चलै, ये अटकावै आनि।। साधु भूखा भाव का, धन का भूखा नाहि। धन

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