एक प्रेम कहानी: प्रेम कहानी: उसे याद है वो सूखा हुआ गुलाब, याद है निशा के मेहँदी वाले हाँथ, याद है वो ठहरा हुआ वक्त और आँखों ही आँखों में बातें, याद है निशा के आँसू कैसे गालों का सफर करते हुए ठोड़ी पर आकर रुक जाते थे और बारिश की बूंदों की तरह टप

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जिंदगी की जंग जीत जाने की हिम्मत तो है रोजगार ना सही पर कमाने की हिम्मत तो है वक्त बेवक्त मिले फिर भी कोई गम नही सूखी रोटी ही सही खाने की हिम्मत तो है महलों में रहने की “राहुल” तेरी औकात नही पर तिनका-तिनका जोड़, घर बनाने की हिम्मत तो है डूब गयी पतवारें

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