नहीं सीखा Gazel By Rahul Red

नहीं सीखा Gazel By Rahul Red

तनहाई की महफ़िल में मुस्कान नहीं सीखा नाजुक फूलों सा कभी मुरझाना नहीं सीखा टूटा हूँ बहुत लेकिन गिर-गिर के सम्भला हूँ कैसी भी हो राह मगर रुक जाना नहीं सीखा भूल गए वो लोग जिनका साथ दिया हर पल उनकी तरह मैंने अहसान जताना नहीं सीखा कड़वा सच बोलता हूँ भले नफरत करे जमाना
Complete Reading

बचपन की यादें Poem By Rahul Red

याद आ रही बचपन की गाँव के उन पलों की नही भा रही हवा मुझे शहर के जलजलों की सरसों के खेतों में भाग-भाग कर पतंग लूटना पहिया चलाने वाले दोस्तों का साथ छूटना छुपा छुपाई का खेल लम्बी कूद,पेड़ों पर चढ़ना यारी ऐसी थी हमारी सुबह दोस्ती शाम को लड़ना गाँव की सुहानी हवा
Complete Reading

बदनामी Gazel By Rahul Red

महफ़िल सजा ली यारों की, तो हुई बदनामी बगिया खिला ली बहारों की, तो हुई बदनामी यह कैसा समाज, जो बदनाम करता फिरता है? मदद कर दी बेसहारों की, तो हुई बदनामी। किसी पे दिल अगर ये मर लिया, तो हुई बदनामी बाँहों में किसी को भर लिया, तो हुई बदनामी। बदनामी के दौर में
Complete Reading

कविता

साहित्य की इस दुनियाँ को युवा झकझोर गए कितने लेखक दुनियाँ में छाप अपनी छोड़ गए लोग साहित्य खो रहे या कविता अपनी अहमियत साहित्य ने इस दुनियाँ को लेखक दिया अनगिनत आज के इस दौर में, गुमनाम हो रही है कविता अस्तित्व बचाने के लिए अब रो रही है कविता। मोबाईल के दौर में
Complete Reading

सूखा गुलाब (एक प्रेम कहानी) लेखक: राहुल रेड

एक प्रेम कहानी: प्रेम कहानी: उसे याद है वो सूखा हुआ गुलाब, याद है निशा के मेहँदी वाले हाँथ, याद है वो ठहरा हुआ वक्त और आँखों ही आँखों में बातें, याद है निशा के आँसू कैसे गालों का सफर करते हुए ठोड़ी पर आकर रुक जाते थे और बारिश की बूंदों की तरह टप
Complete Reading

हिम्मत तो है (गजल) by राहुल रेड

जिंदगी की जंग जीत जाने की हिम्मत तो है रोजगार ना सही पर कमाने की हिम्मत तो है वक्त बेवक्त मिले फिर भी कोई गम नही सूखी रोटी ही सही खाने की हिम्मत तो है महलों में रहने की “राहुल” तेरी औकात नही पर तिनका-तिनका जोड़, घर बनाने की हिम्मत तो है डूब गयी पतवारें
Complete Reading

Create Account



Log In Your Account