“वो पहली मुलाकात की बात” – सचिन ओम गुप्ता

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“वो पहली मुलाकात की बात” – सचिन ओम गुप्ता

चलो एक-दूजे को भूलने की शुरुआत करतें हैं, हम अपनी पहली मुलाक़ात की बात करते हैं वो जो तुम पहली बार किताबें लिए टकरायी थी मेरे सहारे ही संभल पायी थी बस उसी पल जो हमारी नजरें टकरायी थी पगली उस वक़्त तुम बहुत घबरायी थी हड़बड़ी में बस नाम ही बता पायी थी आज
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गरीबी – सचिन ओम गुप्ता

जीवन की इस तपन को मैं रोज महसूस करता हूं, आओ आज मेरे साथ मैं तुम्हें गरीबी से मिलाकर लाता हूं| कैसा भी हो संघर्ष हम कभी पीछे हटेंगे नहीं, जैसा भी हो समय हम कभी उससे डरेंगे नहीं| दुनिया के इस रंग मंच में हमने क्या जुर्म किया, भूख से तड़पती विचारी ‘फुलवा’ को
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मेरे एहसासो के अल्फाज – सचिन ओम गुप्ता

जीवन की कहानी को नए पन्नों में लिखेंगे आज, बीते हुए कल को भूलकर कुछ नया एहसास करेंगे आज करेंगे वादा कुछ कर गुजरने का खुद से आज, इस नव वर्ष को बना लेंगे अपना सा आज। “नव वर्ष की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं”  ऐ चाँद कुछ ऐसा जतन कर दो, न आए फिर
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“सुहागरात” (मधुमायिनी) – सचिन ओम गुप्ता

उस पहली रात की बात न पूछो उस सुहागरात की बात न पूछो, मधुमायिनी की उलझन में थी मैं थोड़ी शरमायी सी थी मैं थोड़ी घबरायी सी थी मैं, उस अलबेली रात की बात न पूछो, मेरे मन की पराकाष्ठा मेरे मन में दबी रही तब तक वो अपनी कामुकता की, तस्वीर दिखाकर चले गए |
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Sachin Om Gupta

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मेरे एहसासो के “अल्फाज” – सचिन ओम गुप्ता

अपने जीवन के कुछ हसीं पल को अपने शब्दों की माला में पिरो रहा था, कुछ अनजाने आए और, मैं सरेआम बिक गया | तुम अपनी कहानी का बस तुम ही एक किरदार हो, तुम ही निर्दोषी हो, तुम ही गुनहगार हो |   आखों में हो गर गुरुर तो इंसान को इंसान नहीं दिखता,
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मैं चित्रकूट का घाट तेरा – सचिन ओम गुप्ता

तुमसे ही सम्मान मिला है, तुमसे ही पहचान मेरी तुम गंगा का बहता पानी, मैं चित्रकूट का घाट तेरा |   तुम बन जाओ मेरी प्रेयषी गंगा, मैं बन जाऊँ अनुरागीं तेरा तुम गंगा का बहता पानी, मैं चित्रकूट का घाट तेरा | कंदमूल, वानर है सब मेरे साथी, तुम बन जाओ गंगा सखी मेरी तुम गंगा का बहता पानी, मैं चित्रकूट का घाट तेरा | मैं अधूरी मेरे राम के बिना तुम बन जाओ सीता मेरी, मैं बन जाऊँ राम तेरा तुम गंगा का बहता पानी, मैं चित्रकूट का घाट तेरा | सचिन ओम गुप्ता, चित्रकूट धाम 0 साहित्य लाइव रंगमंच 2018 :: राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी प्रतियोगिता • पहला पुरस्कार: 5100
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“हम उस इश्क़ को इश्क़ क्या कहें” – सचिन ओम गुप्ता

हम उस इश्क़ को इश्क़ क्या कहें, जो पहली नजर में आँखों में बसी न हो.. हम उस इश्क़ को इश्क़ क्या कहें, जो देखकर इश्क़ को शरमायी न हो… हम उस इश्क़ को इश्क़ क्या कहें, जो ख़्वाबों में आई न हो… हम उस इश्क़ को इश्क़ क्या कहें, जो इश्क़ की ज़ुल्फो से
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नारी – सचिन ओम गुप्ता

      जब नारी में शक्ति सारी फिर क्यों नारी हो बेचारी नारी का जो करे अपमान जान उसे नर पशु समान हर आंगन की शोभा नारी उससे ही बसे दुनिया प्यारी राजाओं की भी जो माता क्यों हीन उसे समझा जाता अबला नहीं नारी है सबला करती रहती जो सबका भला नारी को
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Sahity Live के साथ :: सचिन ओम गुप्ता

उर की हो पीड़ा या हो तुम उदास, लिख डालो बस “SahityLive” के साथ | जीवन की हो उलझन या हो किसी की बात, लिख डालो बस “SahityLive” के साथ | हो कोई लेख या हो कोई कविता, लिख डालो बस “SahityLive” के साथ | बन साथी SahityLive का और कुछ, लिख डालो बस “SahityLive” के साथ | उठाकर अपनी कलम और कुछ, लिख डालो बस “SahityLive” के साथ | (सचिन ओम गुप्ता,चित्रकूट धाम) 0

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