एक आजाद पंछी कैद में रहता है अब.....
कभी साखो पर गुनगुनाया करता था गीत बहुत
बेचारा चुप ही रहता है अब.....
घुमा करता था सारी दुनिया जो कभी
बो � read more >>
लगा के तन मन कर रही कीर्तन -
टहनी - टहनी पे नाच कर ;
जग - जीवन में विहंगिनी महान ,
राग - अनुराग में लिप्त ,
भागी तिमिर -
चमक उठी नील गगन -
पुलकि� read more >>
कविता = ( कामना )
कामनाओं के हो गए सारे ग़ुलाम !
कामनाओं ने ले लिया ग़रज़ का नाम !!
मन घोड़े पर कामना सवार !
मन घोड़े की पकड़ी लगाम !!
पेट दिया त read more >>