कविता- तुम्हारे लिये।
रचना- जितेन्द्र शर्मा
तिथी- 21/01/2023
निवेदन- प्रस्तुत पंक्तियां नायक के ह्रदय की पीड़ा है एक कृतघ्न नायिका के लिये। read more >>
क्यों? न! प्रिय मैं तुम्हें पहचान पाई !
क्यों ?मैं दौड़ती रही उस कठिन समय में तुम संग अकेले !
क्यों ?न राह के कांटे को मैं समझ पाई ?
जो मैंने read more >>
"मुझे बनारस से नहीं,
वो पान वाली गलियों से जानो,
मुझे सुबह के सूर्य अर्ध्य के साथ उगती किरणों से जानो,
मुझे बनारस से नहीं,
मुझे दशाश्व read more >>
"साइकिल का था वो जमाना,
जिसके पीछे बँधा रस्सी पुराना,
वक्त वक्त पर काम आए,
सामान गिरने से बचाए,
चलती बस मेहनतीयो से,
शरीर स्वस्थ निरोग read more >>