भींच दूंगा मैं उसे जो द्वंद में शत्रु है l
स्थिति भले हो मरण की ,
भले हो कटना खंड खंड भी l
मरणासन्न में ही सही ll
होगा विजय का जयघोष भी,
भले � read more >>
प्रेम की स्वप्निल डगर पर
दो तरफ हम एक पथ पर
पुलक चलते, समानांतर
पर कभी जुड़ने की कोई आस न हो
प्रेम हो, पर मिलन की कोई प्यास न हो!
एक सखी � read more >>
कविता . -हंसी खो गई है।
रचना -जितेन्द्र शर्मा।
तिथी -14/01/2023
सब कुछ तो है, बस हंसी खो गई है।
पेड़ से उतर हमने अट्टालिका भवन बनाये हैं।
सोन read more >>
# जो लोग जानते है सबर करना उसे वो चीज़ जरूर मिलती है
जो उसके नसीब मैं लिखा हुआ है
इंतजार के साथ सबर करना भी सीखें
जो आपका है वो आपको आता ह� read more >>
कि खोया बचपन वो अपना हमें याद है,
इन गली रास्तो कि हि तो बात है|
कर लिए आज तक हमने जितने कर्म,
फल के मिलने का हमको भी अहसास है|
की जिंदगी � read more >>