Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

भीड़

Santosh kumar koli ' अकेला' 01 Jun 2025 कविताएँ समाजिक प्रजातंत्र में भीड़ 2896 0 Hindi :: हिंदी

सत्य, न्याय, नियम, 
भीड़ बाढ़ में बह जाते हैं। 
वही सत्य समझ जाता, 
जो मूढ़ मुंड कह जाते हैं। 
भीड़ के रेले से, 
संहत शजर ढह जाते हैं। 
भीड़ के भूकंप से, 
तख़्तोताज धरे रह जाते हैं। 

भीड़ में शक्ल नहीं, 
सर गिने जाते हैं। 
भीड़, भाड़ में, 
गीले, सूखे सब भूने जाते हैं। 
जुमलों, जब़ानी हमलों से, 
स्वार्थ जाल बुने जाते हैं। 
भीड़ के बल से, 
राजा हटाए, चुने जाते हैं। 

भीड़ का न रूप- रंग, 
न शान -शकल होती है। 
भीड़ निज विचारों की छीड़, 
सोच पर साँकल होती है। 
भीड़ होती अंधभक्त, 
तर्क, तत्थों में दख़ल होती है। 
हर परिणाम को पलटने की, 
अटल अटकल होती है। 

भीड़ उसी की, 
जो भीड़ नब्ज़ पढ़ सकता है। 
भीड़ गुल्म का, 
जो मज़मून गढ़ सकता है। 
भीड़ भीत की भीत को, 
प्यादों, वादों से जकड़ सकता है। 
वही वैचारिक नेता, 
भीड़तंत्र में आगे बढ़ सकता है।

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: