Santosh kumar koli ' अकेला' 01 Oct 2024 कविताएँ धार्मिक रावण का दूसरा पक्ष 8110 0 Hindi :: हिंदी
बाहुप्रलंब, बाहुबल से, कैलास को ही उठा दिया। विश्व विजयी ने, त्रिलोक को हिला दिया। सारे देवगण सेवा में रहते, ऐसा जलवा दिखा दिया। शौर्य, बुद्धिमत्ता से, सारी सिद्धियां लंका में बिठा दिया। सोने की लंका, सोने का कण- कण। महान् विभूति था, शख़्स रावण। भक्ति की तो ऐसी की, उसकी नहीं सानी। शिव ने चंद्रहास दिया, ये उसकी निशानी। आज्ञाकारी था पुत्र, मां की आज्ञा मानी। ब्रह्मा की भक्ति में, सिर की दे दी कुर्बानी। सुपर्ण, नाग, यक्ष देव, दैत्य नहीं मारें, ब्रह्मा हुए प्रसन्न, महान् विभूति था शख़्स रावण। महान् विभूति था, शख़्स रावण। पत्नी प्रेमी, स्नेहित भाई, वात्सल्यपूर्ण पिता था। ज्ञान दिया शत्रु लक्ष्मण को, राजनीति का महान् ज्ञाता था। वीणा का वो उस्ताद, समांबद्ध गाता था। साम, दाम, दंड, भेद, माया, नीतियों का प्रयोग आता था। सतीत्व सीता का बचा, यह चरित्र का दर्पण। महान् विभूति था, शख़्स रावण। रावण संहिता, अर्क प्रकाशन लिखा, महान् साहित्यकार था। शिवस्त्रोत, ऋग्वेदीय पद पाठ रचा, वेदों का व्याख्याकार था। इंद्रजाल, तंत्र- मंत्र संगीत, चिकित्सा का महान् जानकार था। संस्कृत भाषा पर उसका, पांडित्यपूर्ण अधिकार था। सस्वर वेद पाठ प्रणाली का, किया प्रचलन। महान् विभूति था, शख़्स रावण। भूत, भविष्य का ज्ञाता, निज मृत्यु का ज्ञान था। स्वर्ग तक सीढ़ियां पहुंचाने का, विचार कितना महान् था। कितना बड़ा वैज्ञानिक, जिसका वाहन पुष्पक विमान था। सात सुखों को भोगा, वो ऐसा भाग्यवान् था। वध हेतु अवतरित हुए, स्वयं नारायण, महान् विभूति था, शख्स़ रावण। महान् विभूति था, शख् रावण।