‘कैसी लगी, लड़की?’ लड़की के घर से निकलकर बिचौलिये ने राजू से प्रश्न किया।
राजू को लड़की कुछ जमी; कुछ नहीं। वह फैसला नहीं कर पा रहा था कि read more >>
कई दफा जिंदगी में ऐसे दौर आते है, जिसमे वो चाहते हुए भी कुछ नही कर पाते है, चले जाते है घर छोड़ कर और मां के हाथ की रोटी खाने के लिए तक तरस ज� read more >>
बहुत अपना है वो, और पराया भी बहुत है
अपना इतना
कि उससे मन की कह लेती हूं
याद आने पर उसकी मुस्कुरा भी लेती हूं
और रो भी लेती हूं
और पराया � read more >>
दिल मेरा तोड़ के जाते हो खुशी मनाने को|
या फिर और भी दिल यूं ही आजमाने को |
लगे ना ॴच तेरे दिल पे कभी मुहब्बत की|
मिले ना दिल तुझे और भी जल� read more >>
एक महिला एक बच्चे को गोद में लेकर मोहन के घर पहुंची और अपने जार-जार हो चुके ब्लाउज को साड़ी के आंचल में छुपाते हुए बोली, ‘‘हुजूर, काम क� read more >>