# निनाद …..
हे मानव तुमसे
मेरी है
ये विनम्र विनती
है यही मेरी
दिल की निनाद …..!
मानव मस्तिष्क के
एक कोने में
सड़ा सा पड़ा
ये जमा हुआ read more >>
आओ, झूमों, नाचो, गाओ
देखो रुत है सावन की आई
घुँघराली, काली घनघोर बदली
जब आसमान में है छाई
धरती ने भी झूम, झूम कर विरह प्यास बुझाई
सावन की � read more >>
रक्षाबंधन एक ऐसा त्यौहार है जिसका कोई मजहब नहीं होती ,कोई धर्म नहीं होती, ऊंच- नीच नहीं होती,कोई बड़ा - छोटा नहीं होता यह तो एक ऐसा अटूट र� read more >>