सदृण सा इक रिश्ता अब भी निभा रही हूँ ,मैं,।
इस, रिश्ते ,में, बातों का ,दौर खत्म है,।
फिर, भी ,एहसास, न, टूट जाये,।
उम्मीद का आखरी सफर निभा रही � read more >>
आश्चर्य कैसी मुसीबतों में,
देह अभिमानी पड़े हुए हैं,
स्वधर्म अपना भूलकर---
माया के चक्कर में फंसे हुए हैं!
मोह-माया कैसी है यह प्रबल---
म� read more >>
मीनावती जो एक हाउसवाइफ थी ,वह अपनी दिनचर्या काम खत्म कर टीवी देखने बैठती है ।वह समाचार में देखती है कि एक कम उम्र के लड़के को गलत चीज की � read more >>
मैनावती एक हाउसवाइफ थी ,वह अपनी दिनचर्या काम खत्म कर टीवी देखने बैठती है वह एक समाचार में देखती है कि एक कम उम्र के लड़के को गलत चीज की ल� read more >>