शिला पर नाम लिखा किसी ने कविता,अधुरा छोड़ दिया जो गुजरी मैं उस राह से , फिर लौटकर आना होगा वापिस इस मुकाम पर कहकर,शीर्ष मैंने पूरा किया,,। read more >>
कौन कहता है कि मां सिर्फ धरती पर हो तब साथ होती है.....
हमारी पहचान उसके संस्कारों से होती है.....
उसकी आवाज हमारे दिलो में धड़कनों को तरह हो� read more >>
शृंगार छंद "तड़प"
सजन मत प्यास अधूरी छोड़।
नहीं कोमल मन मेरा तोड़।।
बहुत ही तड़पी करके याद।
सुनो अब तो तुम अंतर्नाद।।
सदा तारे गिन का read more >>