हो कितनी भी गुस्सा वो!
ख़ुद ही मान जाती है!!
छोटी हो तो चंडी !
बड़ी हो तो दुर्गा कहलाती है!!
भाई भाई की रट वो लगाती है!
दिन भर पकात� read more >>
हूँ ज्ञान का सागर मै!
तुझे श्रेष्ठ कैसे मान लूँ!!
हूँ गलत लाख मै फिर भी!
अपनी गलती कैसे मान लूँ!!
हैं तजुर्बे मेरी उम्र जि� read more >>
है शाम का रंग!
है श्याम का रंग!!
दिल का मेरा प्यारा!
मेरा अपना काला रंग!!
नकारता सभी की सत्ता को!
विमुखता को व्यक्त ये करता है!!
प्र read more >>