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कितना सुन्दर है । ये लम्हाँ सासों मे मेरी ,महक के गुल खिले तेरी बाहों मे कितने साँवन चले । मुहोबत की रोहो मे दिवान जले। तेरी....... read more >>
भाव का भूखा  एक अमीर आदमी बहुत ही संकट में था । उसे लाखों - करोड़ों का नुकसान जो हुआ था, और सारी जीवन की कमाई डूबने के करीब थी ! जीवन की नाव � read more >>
चाहत ,ये मेरी झूठ बनी है। मुहोबत ,ये मैंरी झूठ बनी है। सरेआम, बदनाम हुई है। सरेआम चाहत मेरी.... आखो के आसू से , मेने दिल के पैगाम लखे ह read more >>
भले ही बस गये है रोटी के लिए शहर, गांव क्या है ये हम भूले नहीं है। बंद कोठरी में हम बेमन रहते यहाँ , घर का खुला आँगन हम भूले नहीं है। read more >>
प्रभात गीत रैना बीती भोर हुआ फिर अलसाये क्यों सोते हो इतना सुंदर सुबह सवेरा सो सो कर क्यों खोते हो। जीवन की यह डगर दूर है चलना अभी read more >>
चलते-चलते ख़्याल आया- जीवन को बाहर नहीं अंदर खोजना चलते-चलते ख़्याल आया- यह सफ़र रूहानी है अंदर खोजना एक सांस अंदर- एक सांस बाहर आन� read more >>
बिना एक पल तेरेभी,खालीपन सा लगता है मेरे अब वक्त भी बेवक्त सा लगता है read more >>
आहों की सरगम कैसी है राहों की तड़पन कैसी है बिछुरी मुरली की धुन सुन कर यमुना की धड़कन कैसी है अब और सताओ ना यूंँ छोड़ के जाओ ना बाहों म� read more >>
नानी बाई रो मायरो नानी बाई ने (मायरा) भात भरने के लिए नरसी जी को बुलाया। नरसी जी के पास भात भरने के लिए कुछ नहीं था. वह निर्धन थे लेकिन भग� read more >>
हम दोनों नदियां के तीरे, मध्य हमारे अविरल धारा। अलग - अलग अपनी दुनिया पर, अनाद्यनंत रहे साथ हमारा।। -दिनेश कुमार कीर read more >>
चलते-चलते- यूं ही ख़्याल आया, ये जीवन ये धरती ये आसमान चलती यह- किसकी शक्ति चले-चले, ये जीवन ये धरती ये आसमान चलती ये मौसम- ये बहारें य read more >>
ना. देख ताज सिकन्दर का क़यामत के वक्त से यहाँ, हर कोई खोफ खाता है। । ये जलजलों की रातों का सिलसिला है। यहाँ अपना भाग्य हर कोई खुद लिख� read more >>
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