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(ग़ज़ल): अब न रोएँगे हम, न इतनी बेवफ़ाई करेंगे, वफ़ा की बातें करनी है, बस प्यार में ख़फ़ाई करेंगे। उसके इश्क़ में यूँ ही खो जाएँगे हम, ब� read more >>
एक गांव में एक बड़ा मेला आयोजित हुआ। मेले का दौरान गांव के सभी लोग उत्साह से भरे हुए थे और एक-दूसरे के साथ मिल-जुलकर मनाने के लिए तैयार थ� read more >>
कुछ तो कीमत समझो अभी समय ना गुजरा कुछ तो कीमत समझो डाल दो उन हथियारों को जो उठाए तूने जड़ काटने को कुछ तो कीमत समझो मानव सभ्यता क्य� read more >>
कुछ ने जिंदगी का तमाशा बनाया कुछ ने जिंदगी सँवारना सिखाया जिंदगी के सफर में सबकुछ जिन्दगीभर साथ नहीं रहता यहीं जिंदगी जीने का रास्त read more >>
क्या देखूं दुनिया दारी, रुप अलग हैं रोज इसका, जितना देखें कम हैं, कठिन है समझना इसका। read more >>
हर खवाब को पूर करना असान नहीं होता, यू तो रोज देखती हैं ये आँखे सपना, पर हर सपना साकार नहीं होता, सुकून के लिये सुकून तक का सफर आसान नहीं � read more >>
यू तनहा जो मै जी हा था तुझसे मिलकर मै मुकम्मल हो गया ज़मि तक न थी मेरे पास जो तू आया तो मुझे आसमाँ मिल गया मुझे जीने का विहिद सहारा मिल � read more >>
सामाजिक परिवर्तन परिवर्तन की वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा सार्वजनिक मामलों में धर्म का प्रभाव कम होता जाता है। और इसका स्थान व्यावह� read more >>
पंचायत शब्द का प्रयोग कुछ व्यक्तियों की एक सभा के लिए होता है। जो गांव के सामूहिक मामलों पर फैसले करती है। लोग पंच में इतना अधिक विश्व� read more >>
शहरी नियोजन पर नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय आवास और शहरी नियोजन कार्यमंत्री हरदीप पुरी ने कहा read more >>
(मुक्तक छंद) शब्द चढ़ाने मैं आया हूं । दिल कि बात कहने आया हूं। अपना बना ले तूं रब आज _ खाली झोली लिए आया हूं। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुम� read more >>
(मुक्तक छंद) मौसम आया है जवाँ,मन की आँखें खोल। तुम भी बन जा अब जवाँ,हद में रहकर बोल। मधुर मधुर फिर सृजन कर,सबसे कर पहचान_ अपनी सरल पहचान � read more >>
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