(दोहा छंद)
किसी ने उस से किया था फरेब,
उदास हो निकाल दी थी पाजेब,
आया उसके लिए खुशी बनकर,
मैं बन गया हूं अब उसका कालेब।
(स्वरचित मौलिक)
सं read more >>
"व़क्त ने व़क्त को कुछ ऐसे फेर दिए,
हम अपनों से ही सदा दूर हो गए"..!!
"हम रहे सदा ईंमान के अपनों में,
फिर भी हमें नज़र अंदाज़ कर गए"..!!
-मोती read more >>
(मुक्तक छंद)
समय सही यदि नित चले, मिटता कभी न शान।
समय बड़ा बलवान है,इनसे ही है मान।
रहे मनोबल दृढ़ सदा,साहस हो तब पास_
मुश्किल सब को पार � read more >>