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मानवता से प्यार हो-करूं नहीं तकरार
कुंडलिया छंद मजहब की दीवार को,तोड़ बढूं मैं यार। मानवता से प्यार हो,करूं नहीं तकरार।। करूं नहीं तकरार, मनुज बनकर है रहना। रिश्ते हो म
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ये दुनिया हैं डुबोने वाली-तारने वाला मेरा श्याम हैं
ये दुनिया हैं डुबोने वाली, तारने वाला मेरा श्याम हैं, ये दुनिया तो हैं परदेशी, अपने तो बस श्याम हैं। जय श्री कृष्ण
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महिमा तेरी खूब है-जाने सब संसार
कुंडलिया छंद महिमा तेरी खूब है,जाने सब संसार। माँ तेरे उपकार से, जीवन में है प्यार।। जीवन में है प्यार,नूर आँखों में रहता। माँ तुमसे �
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दिल लगालो कैन्हया से-इस दुनियादारी में क्या रखा हैं
दिल लगालो कैन्हया से, इस दुनियादारी में क्या रखा हैं, तार देगा मेरा कैन्हया , इस दुनिया ने डगा रखा हैं।
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सांवरे से दिल लगाओ-भव से तार देगा वो
दुनिया से दिल क्या लगाना, सांवरे से दिल लगाना, ना करेगा वो वेवफाई, भव से तार देगा वो।
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आया मन आनंद में-खुद पर अब है नाज
कुंडलिया छंद आया मन आनंद में,खुद पर अब है नाज। बिन मौसम बरसात से, रसिया हुआ मिजाज।। रसिया हुआ मिजाज,हुआ फूलों सा जनता। सुरभित हुआ समा�
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कितने घातक हो गए-लगा रखें हैं खोल
कुंडलिया छंद दुविधा में रहते सभी, करते रहते मोल। कितने घातक हो गए,लगा रखें हैं खोल।। लगा रखें हैं खोल,बने फिरते हैं नेता। करते हैं गु�
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एक अनजान नेह-बाँध रखता है सबको
कुंडलिया छंद देता जो है ताजगी,सुन्दर रखता देह। तेरे मेरे बीच में,एक अनजान नेह।। एक अनजान नेह,बाँध रखता है सबको। धरा लगे तब स्वर्ग,कभी
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उपजा मन अनुराग से-सबसे बढ़ा लगाव
कुंडलिया छंद होली की अति है खुशी,भागा अशुभ दुराव। उपजा मन अनुराग से,सबसे बढ़ा लगाव।। सबसे बढ़ा लगाव,भूल कर पिछली कटुता। संगी दुश्मन �
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भाग्य का हुआ सवेरा-कर्म करूं कमनीय
कुंडलिया छंद दोहा में परिचय लिखें, बहुत खूब यह काम। सरल नाम संदीप है, रहूं देवड़ा गाम।। रहूं देवड़ा गाम,धर्म ही पूजा मेरा। कर्म करूं �
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शिक्षा का सम्मान कर-देंगें दृढ़ परिणाम
कुंडलिया छंद शिक्षा का सम्मान कर, देंगें दृढ़ परिणाम। करें देश को सबल सब, होत जगत में नाम।। होत जगत में नाम,सदा गौरव में भारत। घर घर शि
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कण कण में श्री हरि रहे- अपने दिल में खोज
कुंडलिया छंद सब लीला भगवान की,भजन करूं हर रोज। कण कण में श्री हरि रहे, अपने दिल में खोज। अपने दिल में खोज,धाम है प्रभु का मिलता। मन में
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