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मजदूर की व्यथा वह एक ऐसे दिन थे जब सभी खुश रहते थे काम–काज सब करते खुशी–खुशी जीते थे कामगारों में से ही एक दिन, एक कारीगर बोला अपने म read more >>
एक मुस्कान क्या रूप है तेरी, क्या तेरी मुस्कान कोयल जैसी बोली,पपीहे जैसी गान झील सी गहरी आंखे, हिरनी जैसी चाल क्या रूप है तेरी, क्या त� read more >>
Public libraries promote literacy and reading culture As gateways to knowledge and culture, libraries play a fundamental role in society. The resources and services they provide creative learning opportunities, support literacy and education and help shape the new ideas and perspectives that are central to a creative and innovative society. They read more >>
समय सिंधु समय सिंधु में क्या पता, डूबे; उतरे पार। छोटी-सी ये ज़िंदगी, तिनके-सी लाचार।। ★★★ सुबह हँसी, दुपहर तपी, लगती साँझ उदास। आते-आत� read more >>
सरस्वती वंदना माँ वीणा वादिनी मधुर स्वर दो, हर जिह्वा वैभवयुक्त कर दो । मन सारे स्नेहमय हो जाए, ऐसे गुणों का अमृत भर दो ।। माँ वीणा की read more >>
प्रकृति के वरदान हम सब प्रकृति के वरदान अम्बर, जल ,वायु और अग्नि मानव का करती उत्थान हम सब प्रकृति के वरदान पेड़ पौधें, जलीय जीवन बा� read more >>
वर्तमान दौर की कथाएं कहते ‘दीमक लगे गुलाब’ ‘दीमक लगे गुलाब’ युवा कवयित्री प्रियंका ‘सौरभ’ का ‘निर्भयाएं’ के बाद दूसरा संग्रह है, सा read more >>
साक्षरता और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देते हैं सार्वजनिक पुस्तकालय ज्ञान और संस्कृति के प्रवेश द्वार के रूप में, पुस्तकालय समाज म read more >>
सूरज का प्रचण्ड रूप सूरज का यह, प्रचण्ड रूप उगलती आग, यह कड़क धूप त्राहि–त्राहि हैं,सब जीव–जंतु देख मार्तण्ड का, यह अनल रूप मानो धर� read more >>
मोबाइल और हम यह नया जगत है, इसमें दूरभाष सरल होता है कंप्यूटर, मोबाइल, इंटरनेट से, बात सरल होता है चिट्ठी, बैरन, पोस्टकार्ड का, बात नहीं read more >>
करोना क्या था करोना गई दिन बदला,सब काम धंधे में व्यस्त हुएं भाग दौड़, आपाधापि, अपने अपनो में मस्त हुएं करोना क्या था ?, क्या था करोना? � read more >>
एक प्यारी सी बच्ची चालीस - बयालीस साल की घरेलू स्त्री थी सीमा जी का भरापूरा परिवार था । धन - धान्य की कोई कमी नहीं थी । सुधा भी ख़ुश ही थी read more >>
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