बुढ़ापे का सहारा
सीमा... आखिर बात क्या है कल से देख रहा हूं तुम बार - बार छत पर जाती हो ... कई बार छत से चढ़ते - उतरते हुए देखकर आखिरकार दिनेश read more >>
एक शहर मे सेठ रहता था ! सेठ कभी भी अपनी धन सम्पती पर घमण्ड न किया ! वह एक समाजिक विकास करने के लिए हमेशा तत्पर रहता था !किसी के भी के दुख दर्� read more >>
झर-झर बरसे नयन हमारे ज्यूँ झर-झर बदरा बरसे रे
पिया मिलन को आतुर अंखियाँ, हाय रे ! कब से तरसे रे
दरद जिया का सह नहिं जाए, सुध बुध तन बिसराई
� read more >>
" पितृ सम्मान "
रात के दस बज रहे हैं और तुम अभी तक घर नहीं लौटे ... ? कल से तुम्हारा बाहर जाना बंद ... ! !
यह कमरे में धुंंआ किस चीज का है ... ?
सिगर read more >>
अनमोल धरोहर
डैडी... आज आपके रखें नये ड्राइवर ने मेरे साथ बदतमीजी की ... देर शाम लौटी जांहवी ने अपने पापा को बाहर हाल में बैठे हुए देखकर शि� read more >>
(दोहा छंद)
नफा और नुकसान दो,पहलू ही है माप।
दिल से कर के काम को, रहें नफा में आप।।
नफा और नुकसान से, पहले डर मत यार।
धंधा को अब कर शुरू,जी� read more >>