अरे तुम ना आए यह सही!
तुम नहीं अपनी यादों को क्यों? भेज दिया मुझे तड़पाने के लिए?
सोचती हूं उस दिन को जब हम तुमसे मिले !और उस पल को जब हम तु read more >>
चाहत थी देख लो दिन कैसा होता है रविवार को यह सोचते हुए मैं आ गई इच्छाओं के बाजार में इस दिन से हर दिन कुछ अलग तो नहीं परंतु ऐसा लगता है कु� read more >>
यह गर्मी का दिन भी होता है बड़ा हसीन सा
दिन तो कटते नहीं है रातें भी होती है कुछ हसीन से
रात में छत पर बैठकर चांद को देखा तो वह भी लगा कु� read more >>
मन है आज कुछ उखड़ा उखड़ा था शायद मौसम भी है कुछ रुखा रुखा सा ऐसा लगता है हवाएं टूट गई है जीवन के इस मोड़ पर हवाओं का रुख भी मुझसे मुड़ गया � read more >>
जिंदगी के इस सफर में बहुत कुछ पीछे छूट गया!
बनाए हमने कई रिश्ते पर कई रिश्ते हमसे रूठ गए !
मैं कैसे उनको समझाऊं इस
जीवन रूपी माला में !
ब� read more >>
दिल में उठते हजारों विचारों को एक रूप दूं !उस रूप को मैं फिर से एक सुंदर सा श्रृंगार करूं !
पर सिंगार करने के लिए कौन सा रंग इस जहां से ढूं read more >>