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In twilight's embrace, a love story unfolds, Whispers of tenderness, in words untold. Two souls entwined, a dance of hearts, Each beat echoing, a symphony of art. Through stormy seas or fields of gold, Love's flame enduring, brave and bold. In eternal harmony, their spirits blend, A love story's essence, forever penned. read more >>
Whispers of dreams, fragile and pure, Hearts woven with tales of love's allure. In shadows, we find solace and grace, A tender touch, a gentle embrace. Through trials endured, we still rise, Resilient souls with hope as our prize. Together we'll mend, heal each scar, In unity's embrace, no matter how far. Love's beacon shines, guiding o read more >>
In shadows' embrace, a heart's song sighs, Whispers woven with fragile threads, it tries. Love's gentle touch, a balm to souls weeping, Silent echoes of dreams softly, keeping. Hope's flickering flame, steadfast and true, Guiding lost spirits, hearts anew. Each tear a poem, etched upon night, Unseen treasures, bathed in moon's soft light. read more >>
बूंदी के डाबी किसान आंदोलन के आंदोलनकारी, क्रांतिकारी प्रखर कवि, ओजस्वी वक्ता, वीर अमर शहीद नानक जी भील की शहादत दिवस पर उन्हें कोटि क� read more >>
अन्धविश्वास देखो न मम्मी कहाँ से ये कछुआ आ गया हमारे घर में, दोनों बच्चे उस कछुए को देख कर ख़ुशी से उछल पड़े, आयुषी बोली- “अरे मम्मी देखो read more >>
भील बालिका कालीबाई कलासुआ की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि 15 अगस्त 1947 से पूर्व भारत में अंग्रेजों का शासन था। और अंग्रेजों चाहते थे कि उन� read more >>
(दोहा छंद) बेटी नाजुक लाडली,बाबुल के अरमान। चली ब्याह कर संग पति, मुख पर मंगल गान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर( read more >>
(दोहा छंद) दुविधा में रहना गलत, सदा रहें बेबाक। करिए सबकुछ स्पष्ट से, बचा रहे तब नाक।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीप read more >>
(शायरी) बड़ी मुद्दत के बाद उन से मुलाकात हुई, उनके एक शब्द सुनते ही मन कुल्फी सा शीतल हो गया। फिर तो हसियों की लड़ी में बात चलते रहे, दोन� read more >>
(दोहा छंद) नयनों से तूं शर चला,कर दे घायल जान। तुझ में ही हो ध्यान अब, मेरे तुम अभिमान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्ती read more >>
(मुक्तक छंद) सबके दाता राम हैं, हृदय बसा लें राम। सब प्रभु ही सम्हाल दें, करें सरल हर काम। गम को हम तूं मार दें,हरदम रखें जुगार_ जन्म मरण � read more >>
अमावस्या की काली रात थी, जाड़ों की ठंढी मौसम थी। कंपकापते ठंढ से लोग, गर्म बिस्तरों में दुबके हुए थे। आधी रात के समय में, मेरा बीच के read more >>
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