खिदमत में पेश है!
जहां के-
इस सफ़र में फ़िरा,
करते हैं मुकाम वाले भी,,
चाह हो दिल में-
अगर गैब-ए-इल्म की,,
खुद-ब-खुद-
राह इनायत होते हैं,,
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आधी अधूरी ज़िंदगी,
थी किसकी ये दारिंदगी?
थी किस्मत या कोई खेल,
हमने पूछा खुदा से, "क्यों ये है ऐसी हालत तेरी ज़मीन की?"
रात-दिन चलता रहा स read more >>
देखा मन हर्षशाया रातो मे, प्रेम की दीप जलाया साथो मे
गिरता उठता नहलाया बातो ने, उठा पटक धमा चौकड़ी हुआ सातों मे
मन का रुख काँप गया, पप्पू � read more >>
उस की उम्र ही क्या थी जो वो आज कमाने चला गया
थी घर के जिम्मेदारियों का बोझ उस को निभाने चला गया
कोई भूखा ना सोए उस के घरों में ये सोच के व read more >>